लूट मचा ले, लूट मचा ले, लूट…
“राम नाम की लूट है जो लूट सके सो लूट, अंत काल पछताएगा जब तन जहिए छूट।” कबीरदास ने जब कहा तब कहा। बात पुरानी हो गई है। वैसे भी राम तो सिर्फ हिन्दुओं के हैं। लूट तो वैश्विक है। लूट के परम लौकिक आनंद में यह विश्व रमा हुआ है। उसे दूसरे किसी चीज की चिंता-परवाह नहीं है।
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