अंडा रे अंडा, तू काहे हुआ महंगा
अंडा रे अंडा, तू काहे हुआ महंगा
“पहले मुर्गी या अंडा! सवाल थोड़ा बदल देते हैं। अंडा खाए या मुर्गा। इन दिनों हर कोई इसी सोच में पड़ा है कि खाने में क्या बनाएं? ऐसा कुछ दिन और चला तो कहीं लोगों के मुंह से अंडे का स्वाद ही न चला जाए।“
अंडे के दाम आसमान छू रहे हैं। इस महीने इसकी कीमत में 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कई शहरों में एक किलो चिकन और एक क्रेट अंडे एक ही रेट में बिक रहे हैं।
यूं तो हर साल सर्दी शुरू होते ही अंडे के दाम भी बढ़ जाते हैं। अमूमन देखा यह जाता था कि चार रुपए में मिलने वाला अंडा पांच रुपए में बिकने लगता था। मगर, इस बार अंडे की कीमत करीब-करीब दोगुनी हो गई है। जबकि अंडा वस्तु एवं सेवाकर के दायरे में भी नहीं आता। इसे कच्चे माल के अंतर्गत माना जाता है। मुर्गी पालन केंद्रों पर 100 अंडों की क्रेट 585 रुपए में बेची जा रही है। ऐसे में रिटेल में एक अंडे की कीमत करीब सात रुपए के आस-पास पहुंच गई है। कुछ शहरों में तो 7.50 रुपए प्रति अंडा बेचा जा रहा है।
चिकन के बराबर हुए दाम
एक अंडे का औसत वजन करीब 55 ग्राम होता है। ऐसे में 7 से 7.5 रुपए हर अंडे के हिसाब से एक किलो अंडे के दाम 120 से 135 रुपए प्रति किलो के बीच पहुंच जाता है। दूसरी तरफ चिकन के दाम देखें तो ये भी 130 से 150 रुपए किलो है। वहीं ब्रॉयलर दरें करीब 62 रुपए प्रति किलो हैं। पुणे में 100 अंडों का पैक 585 रुपए में मिल रहा है। इस बीच पश्चिम बंगाल सरकार ने पोल्ट्री फेडरेशन को अंडे के दाम 6 रुपए प्रति अंडा रखने के लिए कहा है।
छह महीने पहले तक 100 अंडों की क्रेट 375 रुपए में बिक रही थी, जो अब बढ़कर 585 रुपए तक पहुंच गई है। यानी इस सर्दियों में अंडा चिकन से भी ज्यादा महंगा हो गया है। प्याज, टमाटर और हरी सब्जियां तो पहले से ही किचन का जायका बिगाड़ रहे थे। अब अंडे के बढ़े हुए तेवर ने आम लोगों की परेशानियों को कई गुना बढ़ा दिया है। ऐसा कुछ दिन और चला तो कहीं लोगों के मुंह से अंडे का स्वाद ही न चला जाए।
अंडे महंगे होने की वजह
कहा जा रहा है कि अंडों की डिमांड बढ़ने की एक बड़ी वजह सब्जियों बेतहाशा महंगा होना हैं। हरी सब्जियां 60 से 100 रुपए के बीच बिक रही हैं। आमतौर पर ऐसे दिनों में लोग सब्जियों की जगह अंडे को प्राथमिकता देने लगते हैं। लेकिन अब अंडे ने भी बता दिया है कि वह घास-फूस से कम नहीं है। जब उनके दाम बढ़ सकते हैं तो यह भी उछल कर आसमान छू सकता है।
हालांकि सरकारी तंत्र अंडे महंगे होने की वजह कर्नाटक और तमिलनाडु में पड़े सूखे को मान रहे हैं। दक्षिण के इन राज्यों में सूखे की मार से मक्का का उत्पादन कम हुआ। इस वजह से बाजार में मक्के की कीमत में इजाफा हो गया है। मक्का 1,900 रुपए प्रति क्विंटल बाजार में बिक रहा है। पॉल्ट्री प्रोडक्शन के लिए मक्का सबसे जरूरी है। पॉल्ट्री से जुड़े व्यवसायियों को सूखे की वजह से ऊंची कीमत पर मक्का खरीदना पड़ रहा है। ऐसे में मुर्गियों को पर्याप्त मात्रा में खाना नहीं मिलने से उत्पादन कम हो रहा है। उत्तर भारत के राज्यों में अंडे की सप्लाई अधिकतर दक्षिण भारत के नमककाल जोन से होती है। तकरीबन 3.5 करोड़ अंडे रोजाना वहां उत्तर भारत में भेजे जाते थे। लेकिन वहां से कम संख्या में अंडे आ रहे हैं और मांग बढ़ गई है।
क्या है अधिकारियों का कहना
नेशनल एग कॉर्डिनेशन कमिटी (एनईसीसी) के कार्यकारी सदस्य राजू भोंसले का कहना है कि अंडे की कीमतों में यह उछाल मांग बढ़ने की वजह से हुआ है। उनका मानना है कि अंडे की मांग में पहले की तुलना में 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि मार्केट सूत्रों का कहना है कि अंडे की मांग में 15 नहीं बल्कि 25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वहीं नेशनल एग कॉर्डिनेशन कमिटी के मैसूर जोन के चेयरमैन एम पी सतीश बाबू ने मीडिया से बताया कि नोटबंदी के कारण अंडों और मुर्गियों का प्रोडक्शन काफी कम हो गया था। उस समय लोगों के पास कैश थे नहीं तो डिमांड काफी कम हो गई थी। ऐसे में पॉल्ट्री से उत्पादन भी कम किया जा रहा था।
हमारे अधिकारियों और सरकार की यहीं तो खासियत है। किसी चीज की डिमांड बढ़ने वाली है उन्हें इस बात का अंदाजा ही नहीं होता है। जब कीमतें आसमान छूने लगती है तब उनकी आंखें खुलती है। सरकार और व्यवस्थापक इस बात को भली-भांति से जानते हैं कि किस सीजन में कौन सी चीज की मांग बढ़ने वाली है या बाजार में क्या पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है और क्या नहीं। लोगों की जेब पर कैंची ना चले इसकी व्यवस्था वे समय रहते कर सकने में सक्षम हैं। लेकिन जब बाजार अपना सुरसा सा मुंह खोल देती है तब वे कारण गिनवाने बैठ जाते हैं। खैर, सामान्य नागरिक तो अंडे को ही दोषी मान रहा है और कह रहा है, ‘अंडा रे अंडा, तू काहे हुआ महंगा।’
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