गुजरात: भाजपा की चुनाव जीत नीति
गुजरात: भाजपा की चुनाव जीत नीति
“गुजरात विधानसभा की रणभेरी बज चुकी है। भाजपा और कांग्रेस दोनों पार्टियों ने अपने योद्धाओं को मैदान में उतार दिया है। लड़ाई आर-पार की है।”
गुजरात विधानसभा की रणभेरी बज चुकी है। भाजपा और कांग्रेस दोनों पार्टियों ने अपने योद्धाओं को मैदान में उतार दिया है। लड़ाई आर-पार की है। दोनों के लिए जीत अनिवार्य है। हार का विकल्प किसी को स्वीकार्य नहीं है। कांग्रेस की डुबती नैया को किनारे लगाने की जिम्मेदारी राहुल गांधी पर है। पार्टी जल्द ही अपने युवराज को अध्यक्ष बनाने वाली है। ताजपोशी में अगर गुजरात की जात का कोहिनुर जड़ जाए तो हो सकता है कि भाजपा विरोधी दल 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्हें अपना नेता स्वीकार कर ले। दूसरी तरफ भाजपा के लिए गुजरात चुनाव जीतना अपनी इज्जत बचाने जैसा है। गुजरात के सपने को दिखा कर ही नरेन्द्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी दिल्ली पर काबिज हुई है। अगर यह सपना टूटता है तो इनके 2019 के सपने को सच होने में बड़ी रूकावट खड़ी हो जाएगी।
हर हाल में जीत। गुजरात विधानसभा चुनाव इसी फॉर्मूला पर लड़ा जा रहा है। राहुल गांधी की मेहनत गुजरात में रंग लाती दिख रही है। वे विरोधियों और सरकार से नाराज गुटों को अपनी तरफ आकर्षित करने में लगभग कामयाब हो रहे हैं। लेकिन चुनाव भी क्रिकेट मैच की तरह होता है। आखिरी ओवर में मैच का रुख बदल सकता है। गुजरात चुनाव प्रचार के भी समझिए की अब आखिरी कुछ ओवर ही बचे हैं। 9 दिसंबर को पहले चरण का और 14 दिसंबर को दूसरे चरण के चुनाव के लिए मतदान होने है। आखिरी ओवरों में भाजपा की तरफ से बैटिंग करने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी स्वयं उतर रहे हैं। राज्य में आज से उनकी रैली शुरू हो रही है। वैसे उनके ‘मन की बात’ से बूथ लेवल की कम्पैनिंग तो अमित शाह ने कल से ही करनी शुरू कर दी है।
अमित शाह बने खेवनहार
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को यूं ही पार्टी के लोग चाणक्य नहीं मानते है। वे एक कुशल कूटनीतिज्ञ हैं। वे जानते हैं कि विपक्षी को कैसे उसके खाने में चित करना है। पिछले लोकसभा चुनाव और कई राज्यों में हुई विधानसभा चुनाव के नतीजे इसकी तस्दीक करने के लिए काफी हैं। लेकिन इस बार चुनौती किसी बाहर वाले से नहीं बल्कि खुद से है। भाजपा राज्य में 22 सालों से सत्ता में है। गृह राज्य गुजरात में भाजपा का दबदबा बनाए रखने के लिए अमित शाह ही नहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी हर दांव लगाएंगे। गुजरात में पिछले पांच विधानसभा चुनावों में हासिल जीत को छठी बार दोहराना है। इसकी सबसे ज्यादा जिम्मेवारी अमित शाह के कंधों पर है।
बूथ लेवल तक की तैयारी
अमित शाह जानते हैं कि इस बार गुजरात में जीत कितनी अहम है। इसलिए वे छोटे से लेकर बड़े मोर्चे पर कहीं कोई चूक नहीं होने देना चाहते। चुनाव से जुड़ी हर छोटी-बड़ी बात पर अमित शाह की पैनी नजर है। गुजरात में उन्होंने अपने भरोसेमंद लोगों को उनकी दक्षता के हिसाब से खास जिम्मेदारी सौंपी हुई है। भाजपा जानती है कि चुनाव जीतने के लिए पन्ना प्रमुखों और बूथ इंचार्ज की भूमिका बहुत अहम होती है। इसलिए गुजरात के सभी 182 विधानसभा सीटो के लिए दस लाख से ज्यादा पन्ना प्रमुखों और लगभग 58 हजार बूथ इंचार्ज लगाए गए हैं। इन सभी से फीडबैक लेने की जिम्मेदारी 182 विधानसभा इंचार्जों को दी गई है और सभी विधानसभा इंचार्ज को अपना फीडबैक भाजपा के गुजरात संगठन मंत्री भिखुभाई दसलानिया को देना होता है। सभी जगह से मिले फीडबैक के आधार पर अमित शाह और उनकी टीम आगे की रणनीति तय करती है।
सोशल मीडिया कैंपेन में लगी टीम
सोशल मीडिया रणनीति को अमल में लाने का जिम्मा भाजपा ने अपने ओवरसीज संयोजक विजय चौथाईवाला को सौंपी है। चौथाईवाला 2014 के लोकसभा चुनाव में पीएम मोदी के सोशल मीडिया की जिम्मेदारी बखूबी निभा चुके हैं। इस टीम में पंकज शुक्ला भी हैं। चौथाईवाला पीएम मोदी और अमित शाह दोनों के ही भरोसेमंद माने जाते हैं।
मीडिया की कमान जेटली के हाथों में
मीडिया में किस मुद्दे को कैसे लेकर जाना है, किस मुद्दे पर किस नेता को प्रेस कान्फ्रेंस करनी है, ये सारा काम भाजपा के राष्ट्रीय सह मीडिया प्रमुख संजय मयुख और पार्टी महासचिव भूपेन्द्र यादव देख रहे हैं। किस मुद्दे पर पार्टी की लाईन क्या होगी यह केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली उन्हें दिल्ली से ब्रीफ करते हैं। अरुण जेटली गुजरात विधानसभा चुनाव के प्रभारी मंत्री हैं।
हर विधानसभा के कॉल सेंटर से फीडबैक
भाजपा महासचिव अनिल जैन 182 विधानसभा सीटो के लिए बनाए गए कॉल सेंटर्स के फीडबैक लेते हैं। किस जगह पर किस मंत्री या मुख्यमंत्री की रैली होगी यह तय करने का काम अनिल जैन कर रहे हैं। गुजरात भाजपा प्रभारी भूपेन्द्र यादव और भाजपा महासचिव रामलाल सभी 182 सीटो पर भाजपा उम्मीदवारों और जिला अध्यक्षों के साथ सीधे फोन संपर्क में हैं। उम्मीदवारों की सभी समस्याओं को सुलझाने की जिम्मेदारी इन्हीं पर है। इसके अलावा भाजपा ने पूरे गुजरात चुनाव को चार जोन में बांटा हैं। गुजरात चुनाव के सह प्रभारी केन्द्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, निर्मला सीतारमण, जितेंद्र सिंह और पीपी चौधरी को एक-एक जोन का प्रभार सौंपा गया है।
वरिष्ठ नेताओं से फीडबैक
पूरे दिन चुनावी प्रचार की भागदौड़ के बाद अमित शाह देर रात को मुख्यमंत्री विजय रुपाणी, उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल, भाजपा महासचिव संगठन रामलाल, गुजरात भाजपा इंचार्ज और महासचिव भूपेन्द्र यादव, भाजपा महासचिव अनिल जैन और संगठन मंत्री गुजरात भिखुभाई दलसानिया के साथ बैठक करते हैं। अगर कोई अन्य वरिष्ठ मंत्री प्रचार में रहता हैं तो वो भी बैठक में रहता हैं। इसी बैठक में मिली फीडबैक के आधार पर अगले दिन की रणनीति का खाका तैयार किया जाता है।
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प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह दोनों ही अच्छी तरह जानते हैं कि राज्य में पिछले विधानसभा चुनावों से ये चुनाव अलग हैं। पिछले तीनों विधानसभा चुनाव भाजपा ने नरेंद्र मोदी को पार्टी के मुख्यमंत्री चेहरे के तौर पर आगे करके लड़े थे। इस बार पार्टी का सीएम चेहरा मोदी नहीं विजय रूपाणी हैं। आनंदीबेन पटेल को हटा कर पार्टी ने रूपाणी को मुख्यमंत्री की गद्दी पर बिठाया था। विजय रूपाणी जैन समुदाय से आते हैं जिनका गुजरात में वोट शेयर लगभग दो फीसदी है। नाराज माने जा रहे पाटीदार समुदाय को इस चुनाव में साधना भी भाजपा के लिए बड़ी चुनौती है। राहुल गांधी और हार्दिक पटेल का गठबंधन अमित शाह के 150 सीट जीतने के लक्ष्य को पूरा होने देगा या नहीं, इसका निर्णय गुजरात की जनता सुनाएगी। फिलहाल भाजपा अपनी जीत की नीति पर आगे बढ़ रही है।
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