गुजरात: भाजपा की चुनाव जीत नीति
“गुजरात विधानसभा की रणभेरी बज चुकी है। भाजपा और कांग्रेस दोनों पार्टियों ने अपने योद्धाओं को मैदान में उतार दिया है। लड़ाई आर-पार की है।”
“गुजरात विधानसभा की रणभेरी बज चुकी है। भाजपा और कांग्रेस दोनों पार्टियों ने अपने योद्धाओं को मैदान में उतार दिया है। लड़ाई आर-पार की है।”
एक तरह से सभी का यह मानना है कि हिमाचल प्रदेश और गुजरात विधानसभा चुनाव के नतीजे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की लोकप्रियता के बढ़ते-घटते ग्राफ को दर्शाएंगे।
हिमाचल प्रदेश की तेरहवीं विधानसभा के चुनाव प्रचार में भाजपा अपने पूरे लाव-लश्कर को लेकर मैदान में उतरी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमित शाह स्वयं चुनाव की देख-रेख कर रहें हैं।
गुजरात में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) 22 सालों से शासन कर रही है। ऐसे में उसे सत्ता विरोधी लहरों का समना करना पड़ सकता है। साथ भाजपा की जीत में अहम भूमिका निभाने वाली नरेन्द्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय है। बीते सालों में वे गुजरात पर उतना ध्यान नहीं दे पाए हैं।
विश्व में सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश होने का गौरव रखने वाली भारतीय राजनीति की यह विडंबना है कि इसके पास...
विश्व में सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश होने का गौरव रखने वाली भारतीय राजनीति की यह विडंबना है कि इसके पास लोक से जुड़े नेता न के बराबर हैं। एक दौर था जब जमीन से जुड़े नेताओं का राष्ट्रीय राजनीति में बोलबाला होता था। परंतु आज जब भी किसी राज्य में विधानसभा चुनाव की बात होती है तो दो ही चेहरे सामने आते हैं कांग्रेस से राहुल गांधी और भारतीय जनता पार्टी से नरेन्द्र मोदी।
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