आईएएस अधिकारी सीके अनिल भगोड़ा घोषित
आईएएस अधिकारी सीके अनिल भगोड़ा घोषित
“सीके अनिल कहां है, यह किसी को मालूम नहीं मालूम है। अपने ऊपर चल रहे मामलों की सुनवाई में वे कभी कोर्ट में उपस्थित नहीं हुए। इसलिए इस हाईकोर्ट ने सख्त रूख अख्तियार किया है।“
भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के एक अधिकारी को पटना हाई कोर्ट ने भगोड़ा घोषित कर दिया है। ये अधिकारी हैं चन्द्रकांत कुमार अनिल, जिन्हें लोग-बाग सीके अनिल के नाम से जानते हैं। अपने सीनियर आईएएस अधिकारी पर गलत आरोप लगाने के मामले में पटना हाईकोर्ट ने उन्हें नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया है। उन्हें कोर्ट में उपस्थित होने के लिए एक महीने का समय दिया गया है।
प्रधान सचिव पर झूठा आरोप लगाने का मुकदमा
मामला वर्ष 2011 का है। तत्कालीन जन शिकायत के सचिव सीके अनिल ने प्रधान सचिव अफजल अमानुल्लाह पर गाड़ी और टेलीफोन के गलत उपयोग का आरोप लगाया था। सरकार ने सीके अनिल से इस बाबत सबूत मांगा, पर अनिल सबूत नहीं दे सके। न्यायमूर्ति अजय कुमार त्रिपाठी तथा न्यायमूर्ति नीलू अग्रवाल की खंडपीठ के समक्ष प्रधान अपर महाधिवक्ता ललित किशोर राज्य सरकार का पक्ष रख रहे थे। किशोर ने अदालत को बताया कि सीके अनिल द्वारा सीनियर अधिकारी पर लगाए गए आरोपों की सरकार ने जांच कराई, जिसमें आरोप गलत पाए गए। इसके बाद सरकार ने सीके अनिल को कई बार कारण बताओ नोटिस जारी की पर उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। इस कारण सरकार ने उनके वेतन में कमी करने की सजा दी। फिलहाल कोर्ट ने किशोर की दलील को मंजूर करते हुए सीके अनिल को नोटिस जारी किया है।
बीपीएससी के पेपर भी लीक करने के है आरोप
सीके अनिल पर एक और आरोप है। वे बिहार कर्मचारी चयन आयोग (बीपीएससी) के प्रश्नपत्र लीक मामले में भी मुख्य आरोपी हैं। इस मामले में भी हाईकोर्ट की तरफ से उन्हें एक नोटिस जारी किया गया है। उन पर आरोप है कि वे बीपीएससी द्वारा आयोजित क्लर्क लेवल परीक्षा के प्रश्नपत्र आउट कराने के लिए बिस्कोमान भवन स्थित कार्यालय में जबरन घुस कर आईएएस सुधीर कुमार के कंप्यूटर से छेड़खानी कर प्रश्नपत्र में हेर-फेर किया था। इस मामले में सुधीर कुमार गिरफ्तार किए जा चुके हैं।
भगोड़ा हुए घोषित
सीके अनिल कहां है, यह किसी को मालूम नहीं मालूम है। उन पर चल रहे मामलों की सुनवाई में वे कभी कोर्ट में उपस्थित नहीं हुए। इसलिए इस हाईकोर्ट ने सख्त रूख अख्तियार किया है। हाई कोर्ट ने उन्हें भगोड़ा घोषित करते हुए एक महीने की मोहलत दी है ताकि वे कोर्ट के समक्ष अपनी बात रख सकें। हाईकोर्ट ने अपने ताजा आदेश में साफ-साफ कहा है कि यदि वे एक माह यानी 14 दिसंबर, 2017 के अंदर कोर्ट में हाजिर नहीं होंगे तो उनके खिलाफ एकतरफा कार्रवाई की जाएगी। नोटिस खगड़िया स्थित उनके पैतृक आवास पर भी भिजवाया गया है। साथ अखबारों में भी नोटिस का विज्ञापन प्रकाशित किया गया है। उन्हें नोटिस प्रकाशित होने की तारीख से एक महीने के अंदर हाजिर होने का आदेश दिया गया है। इसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि एक महीने के अंदर वह स्वयं या अपने किसी अधिवक्ता के माध्यम से इस केस में हाजिर हो जाएं।
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