हीरो से भगोड़े बने आईएएस अधिकारी
हीरो से भगोड़े बने आईएएस अधिकारी
“नौकरी चाहे सिविल सर्विसेज की ही क्यों न हो, अगर अधिकारी सत्ता से तालमेल नहीं बैठाते तो उनके लिए काम करना मुश्किल हो जाता है।“
हमारी चुनी हुई सरकार कितनी काबिल हैं, इसका अंदाजा लगाना थोड़ा मुश्किल है। उनके नीति और कामकाज के पीछे देश की सबसे कठिन माने जाने वाले संघ लोक सेवा की परीक्षा को उतीर्ण करने वाले अधिकारी होते हैं। इसलिए कभी कोई आठवीं पास स्वास्थ्य मंत्री बन जाता है और कोई बिना अक्षर के ज्ञान के भी मुख्यमंत्री पद पर बैठ जाता है। बात बिहार की ही हो रही है। हाल ही में पटना हाई कोर्ट ने आईएएस अधिकारी सी के अनिल को भगोड़ा घोषित कर उनके खिलाफ नोटिस जारी किया है।
सीके अनिल 25 सालों से बिहार प्रशासनिक सेवा में हैं। वे 1991 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। उनकी नियुक्ति फिलहाल बिहार राज्य प्लानिंग बोर्ड के सलाहकार पद पर हैं। परंतु पिछले कुछ समय से वे भूमिगत हो गए हैं। कोई नहीं जानता वे कहां हैं। वे मूलतः खगड़िया के रहने वाले हैं। एक समय था जब अनिल को उनके साथी अधिकारियों के बीच में बेहद होशियार और योग्य अधिकारी माना जाता था। कई आईएएस अधिकारी अभी भी यह मानते हैं कि उन्हें नौकरशाहों और राजनेताओं के भ्रष्ट गठजोड़ की वजह से छिपना पड़ रहा है।
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अपने ऊपर लगे आरोपों पर सीके अनिल की दलील
सीके अनिल अपना पक्ष रखने के लिए आज तक कोर्ट में हाजिर नहीं हुए हैं। आखिरी दफा वे अप्रैल 2017 में मीडिया से रूबरू हुए थे। तब उन्होंने अपने फंसाए जाने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि अगर वे सामने आए तो उन्हें गिरफ्तार कर जेल में ड़ाल दिया जाएगा और उनका करियर भी आईएएस अधिकारी सुधीर कुमार की तरह खत्म हो जाएगा। अपने फंसाए जाने की वजह वे सरकार की हां में हां नहीं मिलाने को मानते हैं। सीके अनिल के शब्दों में, “वजह सिर्फ इतनी है कि सरकार तीन आईएएस अफसरों को नियम विरुद्ध प्रमोशन देना चाह रही थी। जिसकी उन्होंने शिकायत की और उन्हें प्रमोशन नहीं मिला। जिन तीन अधिकारियों को प्रमोशन दिया गया वे सरकार के चहेते और मुख्यमंत्री के करीबी थे। इसलिए वे सब लोग मिलकर उनके खिलाफ साजिश कर रहे हैं।”
बीपीएससी पर्चा लीक कांड के बारे में सीके अनिल ने कहा था कि वे इसकी जांच सीबीआई से करवाना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने कई बार पीएमओ को पत्र भी लिखा ताकि मामले की सीबीआई द्वारा निष्पक्ष जांच करवाई जा सके। उनका कहना था कि राज्य सरकार जो एसआईटी द्वारा जांच करवा रही वह निष्पक्ष नहीं है। उसमें पहले से ही उन्हें दोषी करार देने का निर्णय ले लिया गया है।
अपने फरार होने की बात पर उनका कहना था कि उन्होंने रजिस्टर्ड डाक से तीन महीने के अवकाश का आवेदन भेजा था। मगर सरकार की तरफ से कहा गया कि उनकी छुट्टी स्वीकृत नहीं की गयी है और उन्हें एक हफ्ते के अंदर प्लानिंग बोर्ड के सलाहकार पद पर ज्वाईन करने का निर्देश दिया गया।
सीके अनिल एक ऐसे अधिकारी थे जिन्हें जनता हीरो के रूप में देखती थी। वे अपने बेहतरीन कामकाज के लिए जाने जाते थे। लेकिन आज देखिए तो बिहार के इस सीनियर आईएएस अधिकारी सीके अनिल की कहानी अजीब लगेगी। आज वे भागे-भागे फिर रहे हैं। सीके अनिल वहीं अधिकारी हैं जिन्होंने शहाबुद्दीन जैसे डॉन को सबक सिखाया था। तब सीवान सहित पूरे बिहार में शहाबुद्दीन का आतंक हुआ करता था। जब सीके अनिल सीवान के डीएम बने तो उन्होंने जिले में कानून स्थापित करने के लिए आईपीएस रत्न संजय के साथ मिलकर शहाबुद्दीन के गिरेबान पर हाथ ड़ाला था। शहाबुद्दीन तब तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव का काफी करीबी माना जाता था। शहाबुद्दीन को जेल भेजने और उसके खिलाफ मामला दर्ज करना उस वक्त बहुत बड़ी बात थी। शहाबुद्दीन को अगर 2004 के मर्डर के केस में आजीवन कारावास की सजा मिली है तो इन दो अधिकारियों के वजह से ही। परंतु आज विडंबना देखिए सीके अनिल को ही कानून से भागना पड़ रहा है।
नौकरी चाहे सिविल सर्विसेज की ही क्यों न हो, अगर अधिकारी सत्ता से तालमेल नहीं बैठाते तो उनके लिए काम करना मुश्किल हो जाता है। हरियाणा के आईएएस अधिकारी अशोक खेमका के तबादले से जुड़ी खबरें तो आए-दिन हम सुनते ही रहते हैं। अभी हाल ही में उनका 50वां तबादला हुआ है।
खेमका ने राबर्ट वाड्रा के साथ हुई जमीन की लेन-देन के खिलाफ तत्कालीन हुड्डा सरकार के खिलाफ आवाज उठाई थी। तब से उनके साथ तबादले का खेल जारी है।
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